थायरॉइड का पक्का इलाज़

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आयुर्वेद एवं योगा एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो असंभव को संभव कर सकती है। हमारे संतो ने कुछ ऐसे आयुर्वेदिक टोटके बनाए इससे थायराइड ठीक हो जाता है। चिकित्सा से हमने बहुत से थायराइड रोगियों को ठीक किया। यह चिकित्सा सभी थायराइड रोगियों पर एक समान कार्य करती है। इस पद्धति में रोगी को अपने पैर के तलवे पर लाल भस्म लगानी होती है।
जिस से उसका थायराइड हमेशा के लिए ठीक हो जाता है।
लाल भस्म चकित्सा पद्धिति
इस पद्धति के लाभ


चिड़चिड़ेपन को आनंद में बदल देती है
रात को सुंदर आरामदेह नींद आती है,
डिप्रेशन को ठीक करती है,
चेहरे पर तेज वापस लाती है।
स्त्रियों की मासिक ठीक करती है,
थायराइड में मोटापा़ की समस्या का हल करती है।

आयुर्वेद चिकित्सा कारण को दूर कर रोग को ठीक करती है ना कि रोग को आधुनिक चिकित्सा की तरह दबाती है। आधुनिक चिकित्सा से जब रोगी को चिकित्सा दी जाती है तो अक्सर हालात पैदा हो जाते हैं एक रोगी थायराइड का पक्का रोगी बन जाता है।

इस पद्धति में सफलता इस बात पर निर्भर करती है हमने इतनी जल्दी इस चिकित्सा को शुरू किया। नए थायराइड के रोगी तो ८- 10 दिन में ठीक होते देखे गए हैं पुरानी को दो-तीन महीने का समय भी लग सकता है।
साधारण भाषा में थायराइड रोग क्या है
थायराइड ग्रंथि कंठ के निचले भाग पर स्थित होती है जो एक तितली की तरह होता है। यह एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है जो थायरोक्सिन नामक हार्मोन पैदा करती है जिससे
पाचन किर्या को ठीक रखने में मदद मिलती है ।
दिल की धड़कन को समान्य रखती है
शारीरिक व मानसिक विकास को ठीक रखती है।
जब थायराइड ग्रंथि आवश्यकता से कम हार्मोन पैदा करती है इसे हाईपो थायराइड कहते हैं।
अगर यह आवश्यकता से ज्यादा सक्रिय है तो इसे हायपरथायराइड कहते हैं ।

तो जो रोगी इस रोग से पीड़ित है उनका पाचन तंत्र में विकार पैदा हो जाते हैं। शुरू में हम इसके लक्षणों को नहीं ध्यान देते पर जैसे जैसे शरीर में रोग बढ़ता है। तब निम्नलिखित लक्षण प्रकट होने लगते हैं।
शरीर में थकावट होना
हृदय की धड़कन का बढ़ना या कम होना
पेट में वायु का उत्पन्न होना
कब्ज होना या ज्यादा बार शौच के लिए जाना।
हाइपो थाईराइड के लक्षण

सर्दी में अधिक ठण्ड का अनुभव होना या गर्मी में अधिक गर्मी का अधिक अनुभव होना
कबज
रूखी या पीली त्वचा
गले में भारीपन
सेक्स डेफिशियेंसी
मन में खालीपन होना
चिड़चिड़ा होना
अकारण रोने को दिल करना
रक्त में कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ना
ज्यादा या अनियमित मासिक स्राव
शुष्क बाल
कम हुई दिल की धड़कन
समरण शक्ति का अभाव

हायपर थायराइड के लक्षण

भार का कम होना चाहे आपकी भूख बढ़ गई हो या आप ज्यादा खाना भी खा रहे हो
दिल की धड़कन का तेज होना सो से भी अधिक बार दिल का धड़कना
सेक्स डेफिशियेंसी
भूखा बार बार लगना
मन में खालीपन होना
चिड़चिड़ा होना
अकारण रोने को दिल करना
हाथ पैर में कंपन
बार बार शौच को जाना
थकावट मांसपेशियों का कमजोर होना
नींद में गड़बड़ी
त्वचा का मोटा होना
उलझे हुए बाल

लाल चिकित्सा पद्धति

लाल चिकित्सा पद्धति एक अनोखी पद्धति है. इस पद्धति में एक चूर्ण और तरल पदार्थ दिया जाता है।
प्रयोग करने की विधि
रात को सोने से आधा घंटा पहले चूरन की और तरल पदार्थ की पतली पेस्ट बनाएं।
इस पेस्ट को पैरों के तलवों पर लगाएं और थोड़ा खुला छोड़ दें।
निश्चिंत होकर सो जाएं पैरों को नहीं धोना, पैर सुबह उठ कर धोएं
अच्छे परिणाम के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें

पलास्टिक अल्मुनियम, नॉन-स्टिक बर्तनों का प्रयोग ना करें
सोयाबीन का अधिक प्रयोग मत करें
शरीर का शुद्धिकरण करें
लगभग आधा पौना घंटा नियमित योग एवं प्राणायाम कुछ दिन के लिए करें।
ब्रम्ही बदाम चूरन को प्रयोग करें
डिब्बाबंद खाना या पीना प्रयोग ना करें
नारियल का तेल में बना खाना भी लाभ देता है