बेर

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जानिए बेर खाने के अद्भुत फायदे 

बेर का पेड़ हर जगह आसानी से पाया जाता है। बेर के पेड़ में कांटें होते हैं। बेर सुपारी के बराबर होती है। बेर (जूजूबे – Jujube) पोषक तत्वों का संग्रह है। बेर का वैज्ञानिक नाम ज़िज़िफस जुजुबा (Ziziphus jujuba) है। बेर के कच्चे फल हरे रंग के होते हैं जबकि पकने पर थोड़ा लाल या लाल-हरे रंग के हो जाते हैं। बेर दक्षिणी और मध्य चीन सहित दक्षिणी एशिया में बहुत अधिक उगाया जाता है।पके बेर : पके बेर मधुर खट्टे, गर्म, कफकर, पाचक, लघु और रुचिकारक होते हैं और अतिसार, रक्तदोष, दस्त और सूखे के रोग को खत्म करता है। बेर के पत्तों का लेप करने से बुखार और जलन शांत हो जाती है। इसकी छाल का लेप करने से विस्फोटक (चेचक के दाने) खत्म हो जाते हैं। बेर के गुदे को आंखों में लगाने से आंखों के रोग खत्म हो जाते हैं।

बेर खाने के लाभ और  विभिन्न रोगों का उपचार :

1.दमे का रोग :
10-15 बेर के पत्ते और 8-10 जायफल के पत्ते लेकर आधा कप पानी में उबालकर तथा छानकर पीने से दमे का रोग ठीक हो जाता है।
5-5 ग्राम बेर के पत्ते और जायफल के पत्तों को लेकर कप भर पानी में उबालकर छानकर दिन में दो बार पीने से दमे के रोगी को बहुत लाभ मिलता है।
2. आंखों का दर्द : बेर की गुठली को अच्छी तरह से पीसकर और छानकर साफ करके आंखों में डालने से आंखों का लाल होना और आंखों के दर्द आदि रोग दूर हो जाते हैं।
3.मोटापा : बेर के पत्तों को पानी में काफी समय तक उबालकर काढ़ा बनाकर छानकर पीने से शरीर की चर्बी समाप्त हो जाती है।
4. बुखार :बेर की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से बुखार में लाभ मिलता है।मध्यम आकार के बेर के पत्तों के रस का लेप करने से बुखार की जलन शांत हो जाती है।
5. खांसी: शुद्ध मैनसिल को पानी के साथ पीसकर बेरी के पत्तों पर लेपकर सुखाकर सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है
250 ग्राम बेरी का गोंद 7 दिनों तक गुड़ के हलुए में मिलाकर खाने से खांसी दूर हो जाती है
6. आंख की पुतली की सूजन और जलन :बेर की गुठली को घिसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से कनीनिका प्रदाह ठीक हो जाता है। आंखों से बहने वाला पानी भी बंद हो जाता है।
7. पेशाब का रुकना : बेर के पेड़ के मुलायम पत्ते व जीरा मिलाकर पानी में पीसकर उनका भांग जैसा शर्बत बनाकर कपड़े से छानकर खाने से गर्मी के कारण रुका हुआ पेशाब साफ आता है।
8. चेचक :
चेचक में बेर के पत्तों का रस भैंस के दूध के साथ रोगी को देने से रोग का वेग कम होता है। बेर के 6 ग्राम पत्तों के चूर्ण को 2 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर रोगी को खिलाने से भी 2-3 दिन में चेचक खत्म होने लगता है।
बेर के पेड़ की छाल और उसके पत्तों का काढ़ा बनाकर छाछ में मिलाकर पशुओं को पिलाने से उनका चेचक का रोग दूर होता है।
9. मुंह के रोग में : बेर के पत्तों का काढ़ा बनाकर दिन में 2-3 बार कुल्ले करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं। कपूरयुक्त किसी औषधि का सेवन करने से मुंह के छाले, दांत के मसूढ़े ढीले पड़ गये हों और मुंह से लार टपकती हो तो बेर के पेड़ की छाल या पत्तों का काढ़ा बनाकर कुल्ले करना लाभकारी होता है।
10. पुरानी खांसी : लगभग 12 से 24 ग्राम बेर की छाल को पीसकर घी के साथ भूने तथा उसमें सेंधानमक मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें। इससे लाभ होता है।